प्रश्न-कोर्ट मार्शल की संवेदना व्यक्त करें।

 प्रश्न-कोर्ट मार्शल की संवेदना व्यक्त करें। 


 उत्तर-  कोर्ट मार्शल स्वदेश दीपक द्वारा लिखा गया एक नाटक है। जो समाज में हो रहे भेदभाव और उच्च कुल द्वारा नीच जाति के लोगों की  प्रताड़िता को  व्यंग्यात्मक तरीके से प्रस्तुत करता है। कोर्ट मार्शल अधिकतर यह सैन्य व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालन करने तथा शांति बनाए रखने का कार्य करती है। कोर्ट मार्शल उन सैनिकों को किया जाता है। जो कानून को उल्लंघन करता है या उसे अपने हाथों में लेता है जैसा कि इस नाटक में रामचंद्र द्वारा किया जाता है।रामचंदर बी डी कपूर और मोहन वर्मा पर जानलेवा हमला करता है जिसमें वर्मा की मौत तथा बी डी कपूर बुरी तरह घायल हो जाता है। जिसके कारण रामचंद्र का कोर्ट मार्शल होता है।


 भारत आज़ादी के 71 वर्षों बाद बाद भी समाज में छोटी नीच जाति के लोगों को नीच समझा जाता है। आज भी भारत जाती,धर्म और मज़हब के नाम पर सांप्रदायिक झगड़े होते रहते हैं। बड़े ओहदे के लोग छोटे नीचे वाले को दबाए रखते हैं। ऐसे तो भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा तथा लिखित रूप में है । 

 जिसमें सैकड़ों क़ानूनन-मतभेद,छुआछूत तथा जाति को समाप्त करने का प्रावधान उपलब्ध है। लेकिन हमेशा बड़े तबके या बड़े ओहदे के लोग छोटे का शोषण करते हैं। तथा छोटे लोगों को आवाज़ उठाने पर उन्हें दवा भी बड़े आसानी से दिया जाता है। जैसा कि इस नाटक में रामचंद्र दो कैप्टन बी डी कपूर तथा मोहन वर्मा द्वारा प्रताड़ित किया जाता है रामचंद्र एक होनहार और सत्यवादी सवार था। जो कि एक बख्तरबंद रेजिमेंट में कार्यरत है। और जो नीच जाति से संबंध रखता है।


 कोर्ट मार्शल नाटक में बहुत से पात्र है। लेकिन कुछ मुख्य पात्र कर्नल सूरत सिंह जो एक सभा-पति जज है।कोर्ट मार्शल करने का मुखिया है। उन्होंने तब तक लगभग 10 कोर्ट मार्शल कर चुके हैं तथा अपने गुस्से तथा ठोस स्वभाव के कारण प्रसिद्ध है।


 कैप्टन विकास राय  जो बचाव वकील है उन्हें "आत्मा का अरेही" कहा जाता है जो कि किसी भी व्यक्ति से सच्चाई उगलवा सकता है। बहुत ही चालाक और प्रभावी व्यक्तित्व के व्यक्ति हैं कैप्टन विकास के कारण ही सबको पता चल जाता है। कि सच्चाई क्या था गोली मारने के पीछे रामचंद्र ने दोनों पर ही क्यों गोली चलाया था। तहकीकात पर पता चलता है कि रामचंद्र को कैसे नीच जाति होने का कष्ट सहन करना पड़ता था।जैसा कि जब डॉक्टर गुप्ता के बयान के दौरान यह पता चलता है कि रामचंद्र के तबियत खराब होने पर भी कपूर ने उन्हें नीच और छोटे लोग के बहाने बता कर टलवा देता है।


इसके पश्चात सूबेदार बलवान सिंह के गवाही से पता चलता है कि रामचंद्र दौड़ में प्रथम आया था और उच्च स्तर के दौड़ में भाग लेने वाला था। प्रथम आने से उसकी प्रतिभा को देखते हुए उसकी एक्स्ट्रा खुराक भी लगाई गई थी। लेकिन जब कैप्टन कपूर को यह सब पता चलता है तो वह रामचंद्र की ड्यूटी अपने सेवादार के रूप में लगवा लेता है।यह कह कि यह कह कर कि वह उसे रोज अभ्यास कर आएगा क्योंकि वह भी एक एथलीट था। कैप्टन कपूर अभ्यास ना करवा कर वह उसको अपने घर के कार्य में लगा देता है। और उसे गलत नामों से पुकारता है गाली भी देता है रामचंद्र के मना करने पर भी वह गाली देना नहीं छोड़ता उसे और उसकी नीच जाति के होने पर टिप्पणी करता रहता है। यहां तक कि रामचंद्र की मां पर कुल्टा होने का लांछन लगाता है।





 इसी परिपेक्ष में कुछ लाइन प्रस्तुत है:-


 यू अर्श दिखा हमें 

  बुराइयों में रहकर।।


 फर्श पर भी न पहुंच सके

 नीच जाति में रहकर।।


 जब जिस ने पुकारा हमें

 नीच कमीन कहकर।।


 चल दिए सर झुका कर हम

 सब कुछ सह कर।।


 मन तो था कि आज

 तख्तापलट कर देंगे

 फिर अपने जैसे दूसरे ही

 हमें डरा देते हैं

 क्या कर लोगे तुम

 भीड़ से अलग रह कर।।

 

गुस्सा दबाए हुए

 आग जलाते रहे मन ही मन में

 हर दिन को कल कह कर।।


 अरमान बुझाते रहे दिल में

 पता  ना था कि यही गुस्सा

 एक दिन यूं हिम्मत कर देगा।।


 कि मुझे जैसा अकेला ही

 सब सबको मजबूर कर देगा।।


 हाथ में आई थी जो  बंदूक

 सेना में रहकर।।


  दाग दी गोली उसी से

 उसके सीने में

 पुकारा था जिसने मुझे

 फिर से नीच कमीन कहकर।।


 कहते हैं कि जब छोटे-छोटे विरोध लगातार दबा दिए जाए,अन-सुने,अनदेखी कर दिए जाए तो हमेशा एक भयंकर विस्फोट होता है जो कि रामचंद्र ने गोली मारकर किया। 


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